Sunday, 11 May 2025

गौ कथा/Gau Katha

गौ कथा/Gau Katha

((( गौ कथा )))

ये कथा भीष्म पितामह ने युधिषिठर को सुनाई थी .
असल में भीष्म पितामह का कहना था कि गाय का मूत्र और गोबर इतना गुणवान है कि इससे हर रोग का निवारण हो सकता है
इतना ही नहीं इसमें माँ लक्ष्मी का भी वास होता है इसलिए इसे बहुत शुभ माना जाता है  बस यही कारण है कि इस दीवाली के मौके पर हम आपको ये कथा सुना रहे है और गाय की पवित्रता भी दर्शा रहे है
हमारे हिन्दू धर्म में गाय को माँ का दर्ज़ा दिया जाता है . कुछ लोग इससे गाय माँ और कुछ गाय माता कहते है . यहाँ तक कि अगर हम शास्त्रो का इतिहास देखे तो गाय भगवान् कृष्ण को बहुत प्रिय लगती थी इसलिए तो वो ज्यादातर समय अपनी गायों के साथ व्यतीत करते थे . ये अलग बात है कि आज कल गाय को खाने की वस्तु के रूप में भी प्रयोग किया जाने लगा है जिसके लिए बहुत खेद है .

हम जानते है कि केवल हमारे खेद करने से ये पाप रुकने नहीं वाला इसलिए समझाने से कोई फायदा नहीं बस उम्मीद कर सकते है जो लोग गाय को एक वस्तु समझ कर उसका सेवन करते है वो भी जल्द ही ये सब बन्द कर दे

भीष्म पितामह ने सुनाई युधिषिठर को ये कथा..
—एक बार लक्ष्मी जी ने मनोहर रूप यानि बहुत ही अध्भुत रूप धारण करके गायों के एक झुंड में प्रवेश कर लिया और उनके इस सुंदर रूप को देखकर गायों ने पूछा कि, देवी . आप कौन हैं और कहां से आई हैं?

गायों ने ये भी कहा कि आप पृथ्वी की अनुपम सुंदरी लग रही हो . तब गायों ने एकदम से कहा कि सच सच बताओ, आखिर तुम कौन हो और तुम्हे कहाँ जाना है ?
तब लक्ष्मी जी ने विन्रमता से गायों से कहा कि तुम्हारा कल्याण हो असल में मैं इस जगत में अर्थात संसार में लक्ष्मी के नाम से प्रसिद्ध हूं और सारा जगत मेरी कामना करता है मुझे ही पाना चाहता है . मैंने दैत्यों को छोड़ दिया था और इसलिए वे सदा के लिए नष्ट हो गए
इतना ही नहीं मेरे आश्रय में रहने के कारण इंद्र, सूर्य, चंद्रमा, विष्णु, वरूण तथा अग्नि आदि सभी देवता सदा के लिए आनंद भोग रहे हैं। इसके बाद माँ लक्ष्मी ने कहा कि जिनके शरीर में मैं प्रवेश नहीं करती, वे सदैव नष्ट हो जाते हैं और अब मैं तुम्हारे शरीर में ही निवास करना चाहती हूं
लेकिन इसके बाद भी कथा अभी खत्म नहीं हुई क्योंकि गायों ने अब तक माँ लक्ष्मी को अपनाया नहीं था .

गायों ने क्यूँ किया माँ लक्ष्मी जी का त्याग..
देवी लक्ष्मी की इन बातों को सुनने के बाद गायों ने कहा कि तुम बड़ी चंचल हो, इसलिए कभी कहीं भी नहीं ठहरती . इसके इलावा तुम्हारा बहुतों के साथ भी एक सा ही संबंध है, इसलिए हमें तुम्हारी इच्छा नहीं है तुम्हारी जहां भी इच्छा हो तुम चली जाओ तुमने हमसे बात की, इतने में ही हम अपने आप को तुम्हारी कृतार्थ यानि तुम्हारी आभारी मानती हैं

गायों के ऐसा कहने पर लक्ष्मी ने कहा , कि ये तुम क्या कह रही हो ? मैं दुर्लभ और सती हूं अर्थात मुझे पाना आसान नहीं ,पर फिर भी तुम मुझे स्वीकार नहीं कर रही, आखिर इसका क्या कारण है ? यहाँ तक कि देवता, दानव, मनुष्य आदि सब कठोर तपस्या करके मेरी सेवा का सौभाग्य प्राप्त करते हैं अत:तुम भी मुझे स्वीकार करो . वैसे भी इस संसार में ऐसा कोई नहीं जो मेरा अपमान करता हो .

ये सब सुन कर गायों ने कहा , कि हम तुम्हारा अपमान या अनादर नहीं कर रही, केवल तुम्हारा त्याग कर रही हैं और वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हारा मन बहुत चंचल है . तुम कहीं भी जमकर नहीं रहती अर्थात एक स्थान पर नहीं रुक सकती . इसलिए अब बातचीत करने से कोई लाभ नहीं तो तुम जहां जाना चाहती हो, जा सकती हो इस तरह से गायों ने माँ लक्ष्मी का त्याग कर दिया क्योंकि गायों को मालूम था कि लक्ष्मी कभी किसी एक के पास नहीं रहती बल्कि पूरे संसार में घूमती है पर फिर भी माँ लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और इतना सब होने के बाद भी वार्तालाप ज़ारी रखी
अब आखिर में माँ लक्ष्मी ने कहा , गायों. तुम दूसरों को आदर देने वाली हो और यदि तुमने ही मुझे त्याग दिया तो सारे जगत में मेरा अनादर होने लगेगा . इसलिए तुम मुझ भी पर अपनी कृपा करो मैं तुमसे केवल सम्मान चाहती हूँ

तुम लोग सदा सब का कल्याण करने वाली, पवित्र और सौभाग्यवती हो तो मुझे भी बस आज्ञा दो, कि मैं तुम्हारे शरीर के किस भाग में निवास करूं?
इसके बाद गायों ने भी अपना मन बदल लिया और गायों ने कहा, हे यशस्विनी . हमें तुम्हारा सम्मान आवश्य ही करना चाहिए  इसलिए तुम हमारे गोबर और मूत्र में निवास करो, क्योंकि हमारी ये दोनों वस्तुएं ही परम पवित्र हैं।

तब माँ लक्ष्मी ने कहा, धन्यवाद् और धन्यभाग मेरे, जो तुम लोगों ने मुझ पर अनुग्रह किया यानि मेरे प्रति इतनी कृपा दिखाई मैं आवश्य ऐसा ही करूंगी . मैं सदैव तुम्हारे गोबर और मूत्र में ही निवास करूंगी सुखदायिनी गायों अर्थात सुख देने वाली गायों तुमने मेरा मान रख लिया , अत: तुम्हारा भी कल्याण हो बस यही वजह है कि गाय की इन दो वस्तुओ को लक्ष्मी का ही रूप समझा जाता है .

             इस कथा को पढ़ने के बाद ये तो समझ आ ही गया होगा कि गाय का धार्मिक ग्रंथो के अनुसार कितना महत्व है।

Thursday, 29 August 2024

भविष्य पुराण में मोहमद पैंगम्बर से 5 हजार साल पहले ही वेदव्यास जी ने इनके बारे में लिख दिया था

पहलीबार खुलासा हुआ,,,,"भविष्य पुराण "में इस्लाम (मुसलमानों) के बारे में "मोहम्मद "के "जन्म " से भी "5 हज़ार वर्ष "पहले ही श्री वेद व्यास जी ने लिख दिया है!
"लिंड्गच्छेदी शिखाहीनः श्मश्रुधारी सदूषकः !"
"उच्चालापी सर्वभक्षी भविष्यति जनोमम !! 25 !!"
"विना कौलं च पश्वस्तेषां भक्ष्यामतामम !"
"मुसलेनैव संस्कारः कुशैरिव भविष्यति !! 26 !!"
"तस्मान्मुसलवन्तो हि जातयो धर्मदूषकाः !"
"इति पैशाचधर्मश्च भविष्यति मया कृतः  !! 27 !!"
(भविष्य पुराण पर्व 3, खण्ड 3, अध्याय 1,
अनुवाद--"रेगिस्तान" की धरती पर एक "पिशाच" जन्म लेगा जिसका नाम "मोहम्मद" होगा, वो एक ऐसे "धर्म "की नींव रखेगा, जिसके कारण मानव जाति त्राहि माम कर उठेगी !
वो असुर कुल सभी मानवों को समाप्त करने की चेष्टा करेगा!
उस धर्म के लोग अपने लिंग के अग्रभाग को जन्म लेते ही काटेंगे, उनकी शिखा (चोटी ) नहीं होगी, वो दाढ़ी रखेंगे पर मूँछ नहीं रखेंगे। वो बहुत शोर करेंगे और मानव जाति को नाश करने की चेष्टा करेंगे!
राक्षस जाति को बढ़ावा देंगे एवं वे अपने को मुसलमान कहेंगे और ये असुर धर्म कालान्तर में  हिंसा करते करते स्वतः समाप्त हो जायेंगे !
यदि यह श्लोक और इसका अर्थ सत्य है तो मानना पडे़गा कि कम से कम आज के संदर्भ में यह बिलकुल फिट बैठता है विशेषकर आई एस आई, तालिबान और बोको हराम के संदर्भ में।
मुझे आश्चर्य है कि इतना "महत्वपूर्ण ग्रन्थ "जिसमें समय से पहले "सटीक"  "स्पष्ट" तथा सत्य "भविष्यवाणियां वेद व्यास जी पाँच हजार वर्ष पहले लिख गए वो आज इतने महान तथाकथित संतों व कथाकारों ने अब तक दुनियाँ वालों को क्यूँ नहीं बताया?
निवेदन है कि कम से कम आप इसे और दुनियाँ के सभी लोगों तक पहुँचाने की कृपा कीजिए
 🌹⛳ *जय श्री कृष्णा⛳🌹🙏
                    




Thursday, 4 July 2024

श्री बजरंग बाण (हनुमान)

श्री बजरंग बाण
दोहा।               






निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करै सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

जय हनुमान संत हितकारी। सुनि लीजै प्रभु विनय हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै॥
जैसे कूदि सिंधु के पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुरलोका॥

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखिपरम पद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभभई॥

अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥
जय जय लखन प्राण के दाता। आतुर हैव् दुख करहु निपाता॥
जय हनुमान जयति बल सागर। सुर समूह समरथ भट नागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीलै। बैरिहि मारु बज्र की कीलै॥

ॐ हीं हीं हीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा॥
जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकर सुवन वीर हनुमंता॥
बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगनि बेताल काल मारीमर॥

इन्हें मारू, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै। राम दूत धरु मारु धाई कै॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥

वन उपवन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
जनक सुता हरि दास कहावौ। ताकि सपथ, विलम्ब न लावौ॥
जय जय जय धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरण पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥

उठ उठ चलु, तोहि राम दोहाई। पायँ परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चम चम चम चम चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय अनंद हमारो॥

यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की॥
यह बजरंग बाण जो जापै। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहि रहै कलेसा॥

दोहा

उर प्रतीति दृढ़, सरन हैव् पाठ करै धरि ध्यान।
बाधा सब हर, करै सब काम सफल हनुमान॥

Saturday, 29 June 2024

श्री कृष्ण जी की चेतावनी (रस्मीरथी)

कृष्ण की चेतावनी

वर्षों तक वन में घूम घूम
बाधा विघ्नों को चूम चूम
सह धूप घाम पानी पत्थर
पांडव आये कुछ और निखर

सौभाग्य न सब दिन होता है
देखें आगे क्या होता है

मैत्री की राह दिखाने को
सब को सुमार्ग पर लाने को
दुर्योधन को समझाने को
भीषण विध्वंस बचाने को
भगवान हस्तिनापुर आए
पांडव का संदेशा लाये

दो न्याय अगर तो आधा दो
पर इसमें भी यदि बाधा हो
तो दे दो केवल पाँच ग्राम
रखो अपनी धरती तमाम

हम वहीँ खुशी से खायेंगे
परिजन पे असी ना उठाएंगे

दुर्योधन वह भी दे ना सका
आशीष समाज की न ले सका
उलटे हरि को बाँधने चला
जो था असाध्य साधने चला

जब नाश मनुज पर छाता है
पहले विवेक मर जाता है

हरि ने भीषण हुँकार किया
अपना स्वरूप विस्तार किया
डगमग डगमग दिग्गज डोले
भगवान कुपित हो कर बोले

जंजीर बढ़ा अब साध मुझे
हां हां दुर्योधन बाँध मुझे

ये देख गगन मुझमे लय है
ये देख पवन मुझमे लय है
मुझमे विलीन झनकार सकल
मुझमे लय है संसार सकल

अमरत्व फूलता है मुझमे
संहार झूलता है मुझमे

भूतल अटल पाताल देख
गत और अनागत काल देख
ये देख जगत का आदि सृजन
ये देख महाभारत का रन

मृतकों से पटी हुई भू है
पहचान कहाँ इसमें तू है

अंबर का कुंतल जाल देख
पद के नीचे पाताल देख
मुट्ठी में तीनो काल देख
मेरा स्वरूप विकराल देख

सब जन्म मुझी से पाते हैं
फिर लौट मुझी में आते हैं

जिह्वा से काढती ज्वाला सघन
साँसों से पाता जन्म पवन
पर जाती मेरी दृष्टि जिधर
हंसने लगती है सृष्टि उधर

मैं जभी मूंदता हूँ लोचन
छा जाता चारो और मरण

बाँधने मुझे तू आया है
जंजीर बड़ी क्या लाया है
यदि मुझे बांधना चाहे मन
पहले तू बाँध अनंत गगन

सूने को साध ना सकता है
वो मुझे बाँध कब सकता है

हित वचन नहीं तुने माना
मैत्री का मूल्य न पहचाना
तो ले अब मैं भी जाता हूँ
अंतिम संकल्प सुनाता हूँ

याचना नहीं अब रण होगा
जीवन जय या की मरण होगा

टकरायेंगे नक्षत्र निखर
बरसेगी भू पर वह्नी प्रखर
फन शेषनाग का डोलेगा
विकराल काल मुंह खोलेगा

दुर्योधन रण ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा

भाई पर भाई टूटेंगे
विष बाण बूँद से छूटेंगे
सौभाग्य मनुज के फूटेंगे
वायस शृगाल सुख लूटेंगे

आखिर तू भूशायी होगा
हिंसा का पर्दायी होगा

थी सभा सन्न, सब लोग डरे
चुप थे या थे बेहोश पड़े
केवल दो नर न अघाते थे
ध्रीत्रास्त्र विदुर सुख पाते थे

कर जोड़ खरे प्रमुदित निर्भय
दोनों पुकारते थे जय, जय

 - रामधारी सिंह 'दिनकर'

गौ माता कथा ।


( गौ कथा )))

ये कथा भीष्म पितामह ने युधिषिठर को सुनाई थी .
असल में भीष्म पितामह का कहना था कि गाय का मूत्र और गोबर इतना गुणवान है कि इससे हर रोग का निवारण हो सकता है
इतना ही नहीं इसमें माँ लक्ष्मी का भी वास होता है इसलिए इसे बहुत शुभ माना जाता है  बस यही कारण है कि इस दीवाली के मौके पर हम आपको ये कथा सुना रहे है और गाय की पवित्रता भी दर्शा रहे है
हमारे हिन्दू धर्म में गाय को माँ का दर्ज़ा दिया जाता है . कुछ लोग इससे गाय माँ और कुछ गाय माता कहते है . यहाँ तक कि अगर हम शास्त्रो का इतिहास देखे तो गाय भगवान् कृष्ण को बहुत प्रिय लगती थी इसलिए तो वो ज्यादातर समय अपनी गायों के साथ व्यतीत करते थे . ये अलग बात है कि आज कल गाय को खाने की वस्तु के रूप में भी प्रयोग किया जाने लगा है जिसके लिए बहुत खेद है .

हम जानते है कि केवल हमारे खेद करने से ये पाप रुकने नहीं वाला इसलिए समझाने से कोई फायदा नहीं बस उम्मीद कर सकते है जो लोग गाय को एक वस्तु समझ कर उसका सेवन करते है वो भी जल्द ही ये सब बन्द कर दे

भीष्म पितामह ने सुनाई युधिषिठर को ये कथा..
—एक बार लक्ष्मी जी ने मनोहर रूप यानि बहुत ही अध्भुत रूप धारण करके गायों के एक झुंड में प्रवेश कर लिया और उनके इस सुंदर रूप को देखकर गायों ने पूछा कि, देवी . आप कौन हैं और कहां से आई हैं?

गायों ने ये भी कहा कि आप पृथ्वी की अनुपम सुंदरी लग रही हो . तब गायों ने एकदम से कहा कि सच सच बताओ, आखिर तुम कौन हो और तुम्हे कहाँ जाना है ?
तब लक्ष्मी जी ने विन्रमता से गायों से कहा कि तुम्हारा कल्याण हो असल में मैं इस जगत में अर्थात संसार में लक्ष्मी के नाम से प्रसिद्ध हूं और सारा जगत मेरी कामना करता है मुझे ही पाना चाहता है . मैंने दैत्यों को छोड़ दिया था और इसलिए वे सदा के लिए नष्ट हो गए
इतना ही नहीं मेरे आश्रय में रहने के कारण इंद्र, सूर्य, चंद्रमा, विष्णु, वरूण तथा अग्नि आदि सभी देवता सदा के लिए आनंद भोग रहे हैं। इसके बाद माँ लक्ष्मी ने कहा कि जिनके शरीर में मैं प्रवेश नहीं करती, वे सदैव नष्ट हो जाते हैं और अब मैं तुम्हारे शरीर में ही निवास करना चाहती हूं
लेकिन इसके बाद भी कथा अभी खत्म नहीं हुई क्योंकि गायों ने अब तक माँ लक्ष्मी को अपनाया नहीं था .

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गायों ने क्यूँ किया माँ लक्ष्मी जी का त्याग..
देवी लक्ष्मी की इन बातों को सुनने के बाद गायों ने कहा कि तुम बड़ी चंचल हो, इसलिए कभी कहीं भी नहीं ठहरती . इसके इलावा तुम्हारा बहुतों के साथ भी एक सा ही संबंध है, इसलिए हमें तुम्हारी इच्छा नहीं है तुम्हारी जहां भी इच्छा हो तुम चली जाओ तुमने हमसे बात की, इतने में ही हम अपने आप को तुम्हारी कृतार्थ यानि तुम्हारी आभारी मानती हैं

गायों के ऐसा कहने पर लक्ष्मी ने कहा , कि ये तुम क्या कह रही हो ? मैं दुर्लभ और सती हूं अर्थात मुझे पाना आसान नहीं ,पर फिर भी तुम मुझे स्वीकार नहीं कर रही, आखिर इसका क्या कारण है ? यहाँ तक कि देवता, दानव, मनुष्य आदि सब कठोर तपस्या करके मेरी सेवा का सौभाग्य प्राप्त करते हैं अत:तुम भी मुझे स्वीकार करो . वैसे भी इस संसार में ऐसा कोई नहीं जो मेरा अपमान करता हो .

ये सब सुन कर गायों ने कहा , कि हम तुम्हारा अपमान या अनादर नहीं कर रही, केवल तुम्हारा त्याग कर रही हैं और वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हारा मन बहुत चंचल है . तुम कहीं भी जमकर नहीं रहती अर्थात एक स्थान पर नहीं रुक सकती . इसलिए अब बातचीत करने से कोई लाभ नहीं तो तुम जहां जाना चाहती हो, जा सकती हो इस तरह से गायों ने माँ लक्ष्मी का त्याग कर दिया क्योंकि गायों को मालूम था कि लक्ष्मी कभी किसी एक के पास नहीं रहती बल्कि पूरे संसार में घूमती है पर फिर भी माँ

लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और इतना सब होने के बाद भी वार्तालाप ज़ारी रखी
अब आखिर में माँ लक्ष्मी ने कहा , गायों. तुम दूसरों को आदर देने वाली हो और यदि तुमने ही मुझे त्याग दिया तो सारे जगत में मेरा अनादर होने लगेगा . इसलिए तुम मुझ भी पर अपनी कृपा करो मैं तुमसे केवल सम्मान चाहती हूँ

तुम लोग सदा सब का कल्याण करने वाली, पवित्र और सौभाग्यवती हो तो मुझे भी बस आज्ञा दो, कि मैं तुम्हारे शरीर के किस भाग में निवास करूं?
इसके बाद गायों ने भी अपना मन बदल लिया और गायों ने कहा, हे यशस्विनी . हमें तुम्हारा सम्मान आवश्य ही करना चाहिए  इसलिए तुम हमारे गोबर और मूत्र में निवास करो, क्योंकि हमारी ये दोनों वस्तुएं ही परम पवित्र हैं।

तब माँ लक्ष्मी ने कहा, धन्यवाद् और धन्यभाग मेरे, जो तुम लोगों ने मुझ पर अनुग्रह किया यानि मेरे प्रति इतनी कृपा दिखाई मैं आवश्य ऐसा ही करूंगी . मैं सदैव तुम्हारे गोबर और मूत्र में ही निवास करूंगी सुखदायिनी गायों अर्थात सुख देने वाली गायों तुमने मेरा मान रख लिया , अत: तुम्हारा भी कल्याण हो बस यही वजह है कि गाय की इन दो वस्तुओ को लक्ष्मी का ही रूप समझा जाता है .

             इस कथा को पढ़ने के बाद ये तो समझ आ ही गया होगा कि गाय का धार्मिक ग्रंथो के अनुसार कितना महत्व है।

Thursday, 23 February 2023

Shree Dhirender shastri ji ki JIVANI

पूरा नाम (full name) धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
मशहूर या प्रसिद्धि मिली बागेश्वर धाम से
प्रशिद्ध नाम (famous name) बालाजी महाराज।,बागेश्वर महाराज ,धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री
जन्म (birth) 4 जुलाई 1996
जन्म स्थान (birth place) गढ़ा गाँव ,छतरपुर जिला (मध्य प्रदेश)
वर्तमान आयु 27 साल
जाति पंडित
धर्म हिन्दू
पिता का नाम (father name) रामकृपाल गर्ग
माता का नाम (mother name) सरोज गर्ग
दादाजी का नाम (grandfather name) भगवान दास गर्ग
भाई-बहन (brothers and sister) शालिग्राम गर्ग (छोटा भाई)
इसकी एक बहन भी है
वैवाहिक स्थिति (marital status) अविवाहित (unmarried)
शैक्षिक योग्यता (educational qualification) कला वर्ग से ग्रैजुएशन (B.A)
पेशा /व्यवसाय कथावाचक,सनातन धर्म प्रचारक, दिव्य दरबार, यूट्यूब चैनल
धीरेन्द्र शास्त्री जी के गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य (वर्ष 2015 में पद्मविभूषण से सम्मानित)
इनकम /कमाई 3 से 4 लाख प्रतिमाह
नेट वर्थ (Net worth) 19.5 करोड़
बागेश्वर धाम सरकार धीरेन्द्र शास्त्री जी का जन्म 4 जुलाई 1996 को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ागंज गाँव में हुआ था। इसी स्थान पर प्राचीन मंदिर जोकि हनुमान जी को समर्पित है बागेश्वर धाम स्थित है। गढ़ा गाँव धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी का पैतृक गाँव है। इनके दादाजी पंडित भगवान दास गर्ग (सेतु लाल) ने चित्रकूट के निर्मोही अखाड़े से दीक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद ही धीरेन्द्र शास्त्री जी के दादाजी ने बागेश्वर धाम जो की वर्तमान समय में काफी प्रचलित है, इसका जीर्णोद्धार करवाया था। दादाजी पंडित भगवान दास गर्ग इसी धाम में दरबार लगाया करते थे।

धीरेन्द्र शास्त्री जी के पिता रामकृपाल गर्ग कोई कार्य नहीं करते थे वह नशे के आदि थे। परिवार में इनकी माताजी सरोज गर्ग एक ग्रहणी है। धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के एक छोटे भाई शालिग्राम गर्ग हैं जोकि स्वयं भी बागेश्वर धाम को समर्पित हैं। धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गढ़ा गाँव के ही किसी सरकारी स्कूल से पूरी की थी। मात्र 12 वर्ष की आयु में ही Bageshwar Dham Dhirendra Krishn Shastri ने प्रवचन देना शुरू किया था। कहा जाता है कि बागेश्वर धाम सरकार धीरेन्द्र शास्त्री जी पर बालाजी हनुमान की असीम कृपा है किस कारण उन्हें कई सिद्धियां प्राप्त हुई हैं।

Saturday, 10 July 2021

अखण्ड भारत कहाँ तक था,,,

 अखण्ड भारत भारत के प्राचीन समय के अविभाजित स्वरूप को कहा जाता है। प्राचीन काल में भारत बहुत विस्तृत था जिसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, बर्मा, थाइलैंड शामिल थे।[1] कुछ देश जहाँ बहुत पहले के समय में अलग हो चुके थे वहीं पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि अंग्रेजों से स्वतन्त्रता के काल में अलग हुये।

हरे रंग से प्रकशित अखण्ड भारत का एक मानचित्र जिसमें आधुनिक राष्ट्र भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और अफगानिस्तान शामिल हैं।
'वृहद भारत' का एक नक्शा, जो दुनिया के उन क्षेत्रों से मिलकर बन है जो प्राचीन भारत द्वारा सांस्कृतिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक रूप से प्रभावित रहे हैं।

अखण्ड भारत वाक्यांश का उपयोग हिन्दू राष्ट्रवादी संगठनों शिवसेनाराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा विश्व हिन्दू परिषद आदि द्वारा भारत की हिन्दू राष्ट्र के रूप में अवधारणा के लिये भी किया जाता है।[2][3][4]

इन संगठनों द्वारा अखण्ड भारत के मानचित्र में पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि को भी दिखाया जाता है।[3] ये संगठन भारत से अलग हुये इन देशों को दोबारा भारत में मिलाकर अविभाजित भारत का निर्माण चाहते हैं। अखण्ड भारत का निर्माण सैद्धान्तिक रूप से संगठन (हिन्दू एकता) तथा 'शुद्धि से जुड़ा है।[4]

भाजपा जहाँ इस मुद्दे पर संशय में रहती है वहीं संघ इस विचार का हमेशा मुखर वाहक रहा है।[5][6] संघ के विचारक हो०वे० शेषाद्री की पुस्तक The Tragic Story of Partition में अखण्ड भारत के विचार की महत्ता पर बल दिया गया है।[7] संघ के समाचारपत्र ऑर्गनाइजर में सरसंघचालक मोहन भागवत का वक्तव्य प्रकाशित हुआ जिसमें कहा गया कि केवल अखण्ड भारत तथा सम्पूर्ण समाज ही असली स्वतन्त्रता ला सकते हैं।[8] वर्तमान परिस्थितियों में अखण्‍ड भारत के सम्‍बन्‍ध में यह कहना उचित होगा कि वर्तमान परिस्थियों में अखण्‍ड भारत की परिकल्‍पना केवल कल्‍पना मात्र है, ऐसा सम्‍भव प्रतीत नहीं होता है। शिवसेना के सुप्रिमो व हिन्दु ह्रदय सम्राट कहे जाने वाले बाल ठाकरे ने अखण्ड भारत कि स्थापना मे पहले बचे हुए भारत को हिन्दु राष्ट्र घोषित करने के लिए शिवसेना को चुनाव मे उतारा हैं।

अखंड भारत में आज के अफगानिस्थान, पाकिस्तान , तिब्बत, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका आते है केवल इतना ही नहीं कालांतर में भारत का साम्राज्य में आज के मलेशिया, फिलीपीन्स, थाईलैण्ड, दक्षिण वियतनाम, कम्बोडिया ,इण्डोनेशिया आदि में सम्मिलित थे। सन् 1875 तक (अफगानिस्थान, पाकिस्तान , तिब्बत, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका) भारत का ही हिस्सा थे लेकिन 1857 की क्रांति के पश्चात ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गई थी उन्हें लगा की इतने बड़े भू-भाग का दोहन एक केन्द्र से करना सम्भव नहीं है एवं फुट डालो एवं शासन करो की नीति अपनायी एवं भारत को अनेकानेक छोटे-छोटे हिस्सो में बाँट दिया केवल इतना ही नहीं यह भी सुनिश्चित किया की कालान्तर में भारतवर्ष पुनः अखण्ड न बन सके।

  1. अफ़गानिस्तान (1876) :विघटन की इस शृंखला का प्रारम्भ अफ़गानिस्तान से हुआ जब सन् 1876 में रूस एवं ब्रिटैन के बीच हुई गण्डामक सन्धि के बाद अफ़गानिस्तान.
  2. भूटान (1906)
  3. श्रीलंका (1935)
  4. पाकिस्तान(1947)
  5. बंग्लादेश (1971)
  6. बर्मा(म्यामार)=(1937)[9]

Thursday, 15 October 2020

गुरु जी का आशीर्वाद।

 

जय हो गुुरु जी,गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष।

गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मैटैं न दोष।।

    ।। हिन्दी मे इसके अर्थ ।।
कबीर दास जि कहते है – हे सांसारिक प्राणीयों। बिना गुरु के ज्ञान का मिलना असंभव है। तब टतक मनुष्य अज्ञान रुपी अंधकार मे भटकता हुआ मायारूपी सांसारिक बन्धनो मे जकडा राहता है जब तक कि गुरु कि कृपा नहीं प्राप्तहोती।
मोक्ष रुपी मार्ग दिखलाने वाले गुरु हैं। बिना गुरु के सत्य एवम् असत्य का ज्ञान नही होता। उचित और अनुचित के भेद का ज्ञान नहीं होता फिर मोक्ष कैसे प्राप्त होगा ? अतः गुरु कि शरण मे जाओ। गुरु ही सच्ची रह दिखाएंगे।








Saturday, 12 September 2020

हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई का नारा लगाने वाले सेक्युलर हिन्दुओ जरा आँखें खोल कर पढ़ें। आसमानी किताब में क्या लिखा है।

 हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई का नारा लगाने वाले सेक्युलर हिन्दुओ जरा आँखें खोल कर पढ़ें। आसमानी किताब में क्या लिखा है।

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1- ”फिर, जब पवित्र महीने बीत जाऐं, तो ‘मुश्रिको’ (मूर्तिपूजको ) को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घात की जगह उनकी ताक में बैठो। ( कुरान मजीद, सूरा 9, आयत 5) (कुरान 9:5) . http://www.quran.com/9/5 http://www.quranhindi.com/p260.htm
2- ”हे ‘ईमान’ लाने वालो (केवल एक आल्ला को मानने वालो ) ‘मुश्रिक’ (मूर्तिपूजक) नापाक (अपवित्र) हैं।” (कुरान सूरा 9, आयत 28) . http://www.quran.com/9/28 http://www.quranhindi.com/p265.htm
3- ”निःसंदेह ‘काफिर (गैर-मुस्लिम) तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।” (कुरान सूरा 4, आयत 101) . http://www.quran.com/4/101 http://www.quranhindi.com/p130.htm
4- ”हे ‘ईमान’ लाने वालों! (मुसलमानों) उन ‘काफिरों’ (गैर-मुस्लिमो) से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुममें सखती पायें।” (कुरान सूरा 9, आयत 123) . http://www.quran.com/9/123 http://www.quranhindi.com/p286.htm
5- ”जिन लोगों ने हमारी ”आयतों” का इन्कार किया (इस्लाम व कुरान को मानने से इंकार) , उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे। जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें। निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं” (कुरान सूरा 4, आयत 56) http://www.quran.com/4/56 http://www.quranhindi.com/p119.htm
6- ”हे ‘ईमान’ लाने वालों! (मुसलमानों) अपने बापों और भाईयों को अपना मित्र मत बनाओ यदि वे ईमान की अपेक्षा ‘कुफ्र’ (इस्लाम को धोखा) को पसन्द करें। और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे” (कुरान सूरा 9, आयत 23) . http://www.quran.com/9/23 . . http://www.quranhindi.com/p263.htm .
7- ”अल्लाह ‘काफिर’ लोगों को मार्ग नहीं दिखाता” (कुरान सूरा 9, आयत 37) . http://www.quran.com/9/37 . . http://www.quranhindi.com/p267.htm .
8- ” ऐ ईमान (अल्ला पर यकिन) लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे धर्म को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवाले हो (कुरान सूरा 5, आयत 57) . http://www.quran.com/5/57 http://www.quranhindi.com/p161.htm
9- ”फिटकारे हुए, (मुनाफिक) जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।” (कुरान सूरा 33, आयत 61) . http://www.quran.com/33/61 http://www.quranhindi.com/p592.htm
10- ”(कहा जाऐगा): निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा पूजते थे ‘जहन्नम’ का ईधन हो। तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे।” ( कुरान सूरा 21, आयत 98 . http://www.quran.com/21/98 http://www.quranhindi.com/p459.htm
11- ‘और उस से बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके ‘रब’ की आयतों के द्वारा चेताया जाये और फिर वह उनसे मुँह फेर ले। निश्चय ही हमें ऐसे अपराधियों से बदला लेना है।” (कुरान सूरा 32, आयत 22) . http://www.quran.com/32/22 http://www.quranhindi.com/p579.htm
12- ‘अल्लाह ने तुमसे बहुत सी ‘गनीमतों’ का वादा किया है जो तुम्हारे हाथ आयेंगी,”(लूट का माल) (कुरान सूरा 48, आयत 20) . http://www.quran.com/48/20 . . http://www.quranhindi.com/p713.htm
13- ”तो जो कुछ गनीमत (लूट का माल जैसे लूटा हुआ धन या औरते) तुमने हासिल किया है उसे हलाल (valid) व पाक समझ कर खाओ (उपयोग करो)’ (कुरान सूरा 8, आयत 69) . http://www.quran.com/8/69 http://www.quranhindi.com/p257.htm
14- ”हे नबी! ‘काफिरों’ और ‘मुनाफिकों’ के साथ जिहाद करो, और उन पर सखती करो और उनका ठिकाना ‘जहन्नम’ है, और बुरी जगह है जहाँ पहुँचे” (कुरान सूरा 66, आयत 9) . http://www.quran.com/66/9 http://www.quranhindi.com/p785.htm
15- ‘तो अवश्य हम ‘कुफ्र’ (इस्लाम को धोखा देने वालो) करने वालों को यातना का मजा चखायेंगे, और अवश्य ही हम उन्हें सबसे बुरा बदला देंगे उस कर्म का जो वे करते थे।” (कुरान सूरा 41, आयत 27) . http://www.quran.com/41/27 http://www.quranhindi.com/p662.htm

16,       एक मुस्लिम भाई ने बोला जा कर पहले उर्दू पढ़ वो क्या जनता था बेचारा मेने उसको छोटा सा प्रमाण दिया कुरान में से ही सूरा no2 आयत no 223 में साफ लिखा है,*✨✨


نِسَاۗؤُكُمْ : عورتیں تمہاری / औरते तुम्हारी

حَرْثٌ : کھیتی / खेती है

لَّكُمْ : تمہاری / तुम्हारे लिए

فَاْتُوْا : سو تم آؤ / तो तुम आओ

حَرْثَكُمْ : اپنی کھیتی / अपनी खेती में

اَنّٰى : جہاں سے / जिस तरह

شِئْتُمْ : تم چاہو / तुम चाहो

وَقَدِّمُوْا : اور آگے بھیجو / औऱ आगे भेजो

لِاَنْفُسِكُمْ : اپنے لیے / अपने लिए

وَاتَّقُوا : اور دوڑو / और नाफरमानी से बचो

اللّٰهَ : اللہ / अल्लाह की

وَاعْلَمُوْٓا : اور تم جان لو / और तुम जान लो

اَنَّكُمْ : کہ تم / की तुम

مُّلٰقُوْهُ : ملنے والے اس سے / मुलाक़ात करने वाले हो उस से

وَبَشِّرِ : اور خوشخبری دیں / और खुशखबरी दीजिये

الْمُؤْمِنِيْنَ : ایمان والے / ईमान वालो को


ترجمہ :- *تمہاری عورتیں تمہاری کھیتیاں ہیں تمہیں اختیار ہے، جس طرح چاہو، اپنی کھیتی میں جاؤ، مگر اپنے مستقبل کی فکر کرو اور اللہ کی ناراضی سے بچو خوب جان لو کہ تمہیں ایک دن اُس سے ملنا ہے اور اے نبیؐ! جو تمہاری ہدایات کو مان لیں انہیں فلاح و سعادت کا مثردہ سنا دو۔*


तर्जुमा :- *(अल्लाह पर यक़ीन करने वालो) औरते तुम्हारी खेतिया हैं, लिहाजा जिधर से तुम चाहो अपनी खेती में आओ,और अपने लिए (नेक / भले काम) आगे भेजो, और अल्लाह की नाफ़रमानी से बचो, और ध्यान रखो कि तुम्हे (एक दिन) उससे ज़रूर मिलना है, और (मुहम्मद S.A.W. आप) ईमान वालो को खुशखबरी सुना दीजिए।*                

 

सवाल यह उठता है की जिस मजहब के धर्म-ग्रन्थ मे यह सब लिखा हो उस धर्म के लोग गंगा जमुनी तहजीब व् भाईचारे की बात किस मुँह से करते है?