Tuesday, 24 October 2017

Shanti path manters

Shanti Path Mantra
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:,
पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥
Om dyauh shanti rantariksham shantih
Prithvi shantirapah shantih
Oshadhayah shantih Vanaspatayah shantih
Vishvedevaah shantih Brahma shantih
Sarvam shantih Shantireva shantih
Saamaa shantiredhih
Om shaantih, shaantih, shaantih!

Translation of the Mantra

शान्ति: कीजिये, प्रभु त्रिभुवन में, जल में, थल में और गगन में
अन्तरिक्ष में, अग्नि पवन में, औषधि, वनस्पति, वन, उपवन में
सकल विश्व में अवचेतन में!
शान्ति राष्ट्र-निर्माण सृजन में, नगर, ग्राम में और भवन में
जीवमात्र के तन में, मन में और जगत के हो कण कण में
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

May peace radiate there in the whole sky as well as in the vast ethereal space everywhere.
May peace reign all over this earth, in water and in all herbs, trees and creepers.
May peace flow over the whole universe.
May peace be in the Supreme Being Brahman.
And may there always exist in all peace and peace alone.
Om Shanti, Shanti, Shanti to us and all beings!

Mata sarsvati manters

Shri Saraswati Yantra

Goddess Saraswati
1. Saraswati Ekakshar Mantra
ऐं॥
Aim॥
2. Saraswati Dvyakshar Mantra
ऐं लृं॥
Aim Lrim॥
3. Saraswati Tryakshar Mantra
ऐं रुं स्वों॥
Aim Rum Svom॥
4. Saraswati Dashakshar Mantra
वद वद वाग्वादिनी स्वाहा॥
Vad Vad Vagvadini Svaha॥
5. Saraswati Mantra
ॐ ऐं नमः॥
Om Aim Namah॥
6. Saraswati Mantra
ॐ ऐं क्लीं सौः॥
Om Aim Kleem Sauh॥
7. Mahasaraswati Mantra
ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः॥
Om Aim Mahasarasvatyai Namah॥
8. Saraswati Mantra
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः॥
Om Aim Hreem Shreem Vagdevyai sarasvatyai Namah॥
9. Saraswati Mantra
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम्कारी
वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा॥
Om Arham Mukha Kamala Vasini Papatma Kshayamkari
Vad Vad Vagvadini Saraswati Aim Hreem Namah Svaha॥
10. Shri Saraswati Puranokta Mantra
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
Ya Devi Sarvabhuteshu Vidyarupena Samsthita।
Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah॥
11. Saraswati Gayatri Mantra
ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
Om Aim Vagdevyai Vidmahe Kamarajaya Dhimahi।
Tanno Devi Prachodayat॥

Lord vishnu manters

1. Vishnu Moola Mantra
ॐ नमोः नारायणाय॥
Om Namoh Narayanaya॥
2. Vishnu Bhagawate Vasudevaya Mantra
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
Om Namoh Bhagawate Vasudevaya॥
3. Vishnu Gayatri Mantra
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
Om Shri Vishnave Cha Vidmahe Vasudevaya Dhimahi।
Tanno Vishnuh Prachodayat॥
4. Vishnu Shantakaram Mantra
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
Shantakaram Bhujagashayanam Padmanabham Suresham
Vishvadharam Gaganasadrisham Meghavarnam Shubhangam।
Lakshmikantam Kamalanayanam Yogibhirdhyanagamyam
Vande Vishnum Bhavabhayaharam Sarvalokaikanatham॥
5. Mangalam Bhagwan Vishnu Mantra
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
Mangalam Bhagwan Vishnuh, Mangalam Garunadhwajah।
Mangalam Pundari Kakshah, Mangalaya Tano Harih॥

Hanumaan manters

1. Hanuman Moola Mantra
ॐ श्री हनुमते नमः॥
Om Shri Hanumate Namah॥
2. Hanuman Gayatri Mantra
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
Om Anjaneyaya Vidmahe Vayuputraya Dhimahi।
Tanno Hanumat Prachodayat॥
3. Manojavam Marutatulyavegam Mantra
मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्।
वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥
Manojavam Marutatulyavegam Jitendriyam Buddhimatam Varishtham।
Vatatmajam Vanarayuthamukhyam Shriramadutam Sharanam Prapadye॥

Etc manta

Collection of Vedic Mantras
Vedic Mantras of Gods

Lord Ganesha
List of Lord Ganesha Mantras
Shri Ganesha Mantra

Lord Kubera
List of Lord Kubera Mantras
Shri Kubera Mantra

Lord Shiva
List of Lord Shiva Mantras
Lord Shiva Mantra

Lord Rama
List of Lord Rama Mantras
Lord Rama Mantra

Lord Hanuman
List of Lord Hanuman Mantras
Lord Hanuman Mantra

Lord Vishnu
List of Lord Vishnu Mantras
Lord Vishnu Mantra
Vedic Mantras of Goddesses

Shri Lakshmi
List of Mantras of Shri Lakshmi
Shri Mahalakshmi Mantra

Goddess Gayatri
Rigveda Gayatri Mantra
Shri Gayatri Mantra

Dasha Mahavidya
List of Mantras of Dasha Mahavidya
Shri Das Mahavidya Mantras

Goddess Saraswati
List of Goddess Saraswati Mantras
Shri Saraswati Mantra
Other Vedic Mantras

Shanti Path
Mantra of Shanti Path
Shanti Path Mantra

Lakshmi Ganesha Mantra
List of Lakshmi Ganesha Mantras
Lakshmi Ganesha Puja Mantras

Diwali Mantras
List of Diwali Mantras
Deepavali Puja Mantras

Lord shiva mantera

Lord Shiva Mantra

Shri Shiva Yantra

Lord Shiva
1. Shiva Moola Mantra
ॐ नमः शिवाय॥
Om Namah Shivaya॥
2. Maha Mrityunjaya Mantra
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushti-Vardhanam
Urvarukamiva Bandhanan Mrityormukshiya Mamritat॥
3. Rudra Gayatri Mantra
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
Om Tatpurushaya Vidmahe Mahadevaya Dhimahi
Tanno Rudrah Prachodayat॥

Kuber ji manter

Kubera Mantra
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
Om Yakshaya Kuberaya Vaishravanaya Dhanadhanyadhipataye
Dhanadhanyasamriddhim Me Dehi Dapaya Svaha॥
2. Kubera Dhana Prapti Mantra
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥
Om Shreem Hreem Kleem Shreem Kleem Vitteshvaraya Namah॥
3. Kubera Ashta-Lakshmi Mantra
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
Om Hreem Shreem Kreem Shreem Kuberaya Ashta-Lakshmi
Mama Grihe Dhanam Puraya Puraya Namah॥

Lakshmi manter

Lakshmi Vinayaka Mantra (लक्ष्मी विनायक मन्त्र)
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
Om Shreem Gam Saumyaya Ganpataye Vara Varada
Sarvajanam Me Vashamanaya Svaha॥
2. Lakshmi Ganesha Dhyana Mantra (लक्ष्मी गणेश ध्यान मन्त्र)
दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जयालिङ्गितमाब्धि पुत्र्या-लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥
Dantabhaye Chakravarau Dadhanam, Karagragam Swarnghatam Trinetram।
Dhritabjayalingitamabdhi Putrya-Lakshmi Ganesham Kanakabhamide॥
3. Rinharta Ganapati Mantra (ऋणहर्ता गणपति मन्त्र)
ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्॥
Om Ganesha Rinam Chhindhi Varenyam Hum Namah Phat॥

Vedik manter

Shri Ganesha Yantra

Shri Ganesh
1. Vakratunda Ganesha Mantra
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
Shree Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha
Nirvighnam Kuru Me Deva Sarva-Kaaryeshu Sarvada॥
2. Ganesha Shubh Labh Mantra
ॐ श्रीम गम सौभाग्य गणपतये
वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥
Om Shreem Gam Saubhagya Ganpataye
Varvarda Sarvajanma Mein Vashamanya Namah॥
3. Ganesha Gayatri Mantra
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि,
तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
Om Ekadantaya Viddhamahe, Vakratundaya Dhimahi,
Tanno Danti Prachodayat॥

India of temples all extra gyan

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग- कुंभकर्ण के पुत्र को मार कर यहां स्थापित हुए थे भगवान शिव
यह हैं किन्नर कैलाश, कहते है महादेव के इस धाम में जाने की इंसान एक बार ही कर पाता है हिम्मत
बाबा तामेश्वरनाथ धाम- इस शिवलिंग की कुंती ने की थी सबसे पहले पूजा
शलमाला नदी में एक साथ बने है हज़ारों शिवलिंग, नदी की धारा स्वयं करती है अभिषेक
सलेमाबाद शिव मंदिर में पिछले 15 सालों से रोज़ नाग आ कर करता है शिव जी की पूजा
अदभुत- सूर्य की किरणें पड़ते ही सुनहरा हो जाता है कैलाश, बनती है ॐ की आकृति
श्रीखंड महादेव यात्रा- अमरनाथ से भी कठिन है महादेव की यह यात्रा
मंढीप बाबा- इस स्वयंभू शिवलिंग दर्शन के लिए पार करनी पड़ती है एक ही नदी 16 बार, साल में एक बार होते है दर्शन
असीरगढ़ का किला – श्रीकृष्ण के श्राप के कारण यहां आज भी भटकते हैं अश्वत्थामा, किले के शिवमंदिर में प्रतिदिन करते है पूजा
काठगढ़ महादेव – यहां है आधा शिव आधा पार्वती रूप शिवलिंग (अर्धनारीश्वर शिवलिंग)
11 to 20



स्तंभेश्वर महादेव – शिव पुत्र कार्तिकेय ने करी थी स्थापना, दिन में दो बार नज़रों से ओझल होता है यह मंदिर
टूटी झरना मंदिर- रामगढ़(झारखंड) – यहाँ स्वयं माँ गंगा करती है शिवजी का जलाभिषेक
बिजली महादेव- कुल्लू -हर बारह साल में शिवलिंग पर गिरती है बिजली
लिंगाई माता मंदिर – स्त्री रूप में होती है शिवलिंग की पूजा
अचलेश्वर महादेव – अचलगढ़ – एक मात्र मंदिर जहां होती है शिव के अंगूठे की पूजा
ममलेश्वर महादेव मंदिर – यहां है 200 ग्राम वजनी गेहूं का दाना – पांडवों से है संबंध
नागचंद्रेश्वर मंदिर – साल में मात्र एक दिन खुलता है मंदिर
चमत्कारिक भूतेश्वर नाथ शिवलिंग – हर साल बढ़ती है इसकी लम्बाई
अनोखा शिवलिंग – महमूद गजनवी ने इस पर खुदवाया था कलमा
महादेवशाल धाम – जहाँ होती है खंडित शिवलिंग की पूजा – गई थी एक ब्रिटिश इंजीनियर की जान
21 to 30

निष्कलंक महादेव – गुजरात – अरब सागर में स्तिथ शिव मंदिर – यहां मिली थी पांडवों को पाप से मुक्ती
परशुराम महादेव गुफा मंदिर – मेवाड़ का अमरनाथ – स्वंय परशुराम ने फरसे से चट्टान को काटकर किया था निर्माण
कमलनाथ महादेव मंदिर – झाडौल – यहां भगवान शिव से पहले की जाती है रावण की पूजा
कामेश्वर धाम कारो – बलिया – यहाँ भगवान शिव ने कामदेव को किया था भस्म
अचलेश्वर महादेव – धौलपुर(राजस्थान) – यहाँ पर है दिन मे तीन बार रंग बदलने वाला शिवलिंग
लक्ष्मणेश्वर महादेव – खरौद – यहाँ पर है लाख छिद्रों वाला शिवलिंग (लक्षलिंग)
भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) – भोपाल – यहाँ है एक ही पत्थर से निर्मित विशव का सबसे बड़ा शिवलिंग
जंगमवाड़ी मठ – वाराणसी : जहा अपनों की मृत्यु पर शिवलिंग किये जाते हे दान
एक हथिया देवाल- मात्र एक हाथ से और एक रात में बने इस प्राचीन शिव मंदिर के शिवलिंग की नहीं होती है पूजा, आखिर क्यों?
Mata Temple  (माता के मंदिर)



1 to 10

कामाख्या शक्तिपीठ से जुड़े कुछ रोचक तथ्य, जो कम लोगों को है पता
मैहर देवी का मंदिर: ये है माँ शारदा का इकलौता मंदिर, यहाँ आज भी आते हैं आल्हा और उदल
चूड़ामणि देवी मंदिर- मान्यता है की इस मदिर में चोरी करने पर ही पूरी होती है मनोकामना
श्राई कोटि माता मंदिर- यहां पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते मां दुर्गा के दर्शन, शिव पुत्रों से जुडी है कहानी
ज्वालामुखी देवी – यहाँ अकबर ने भी मानी थी हार – होती है नौ चमत्कारिक ज्वाला की पूजा
दंतेश्वरी मंदिर – दन्तेवाड़ा – एक शक्ति पीठ – यहाँ गिरा था सती का दांत
51 Shakti Peeth (51 शक्ति पीठ)
करणी माता मंदिर, देशनोक (Karni Mata Temple , Deshnok) – इस मंदिर में रहते है 20,000 चूहे, चूहों का झूठा प्रसाद मिलता है भक्तों को
कामाख्या मंदिर – सबसे पुराना शक्तिपीठ – यहाँ होती हैं योनि कि पूजा, लगता है तांत्रिकों व अघोरियों का मेला
तरकुलहा देवी (Tarkulha Devi) – गोरखपुर – जहाँ चढ़ाई गयी थी कई अंग्रेज सैनिकों कि बलि

HARYANA KE KURUKSHETRA KO HI KYO CHUNA MAHABHARAT KE LIYE JANE

Kurukshetra in Hindi : महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में लड़ा गया। कुरुक्षेत्र में युद्ध लड़े जाने का फैसला भगवान श्री कृष्ण का था। लेकिन उन्होंने कुरुक्षेत्र को ही महाभारत युद्ध के लिए क्यों चुना इसकी कहानी कुछ इस प्रकार है।


जब महाभारत युद्ध होने का निश्चय हो गया तो उसके लिये जमीन तलाश की जाने लगी। श्रीकृष्ण जी बढ़ी हुई असुरता से ग्रसित व्यक्तियों को उस युद्ध के द्वारा नष्ट कराना चाहते थे। पर भय यह था कि यह भाई-भाइयों का, गुरु शिष्य का, सम्बन्धी कुटुम्बियों का युद्ध है। एक दूसरे को मरते देखकर कहीं सन्धि न कर बैठें इसलिए ऐसी भूमि युद्ध के लिए चुननी चाहिए जहाँ क्रोध और द्वेष के संस्कार पर्याप्त मात्रा में हों। उन्होंने अनेकों दूत अनेकों दिशाओं में भेजे कि वहाँ की घटनाओं का वर्णन आकर उन्हें सुनायें।

एक दूत ने सुनाया कि अमुक जगह बड़े भाई ने छोटे भाई को खेत की मेंड़ से बहते हुए वर्षा के पानी को रोकने के लिए कहा। पर उसने स्पष्ट इनकार कर दिया और उलाहना देते हुए कहा-तू ही क्यों न बन्द कर आवे? मैं कोई तेरा गुलाम हूँ। इस पर बड़ा भाई आग बबूला हो गया। उसने छोटे भाई को छुरे से गोद डाला और उसकी लाश को पैर पकड़कर घसीटता हुआ उस मेंड़ के पास ले गया और जहाँ से पानी निकल रहा था वहाँ उस लाश को पैर से कुचल कर लगा दिया।

इस नृशंसता को सुनकर श्रीकृष्ण ने निश्चय किया यह भूमि भाई-भाई के युद्ध के लिए उपयुक्त है। यहाँ पहुँचने पर उनके मस्तिष्क पर जो प्रभाव पड़ेगा उससे परस्पर प्रेम उत्पन्न होने या सन्धि चर्चा चलने की सम्भावना न रहेगी। वह स्थान कुरुक्षेत्र था वहीं युद्ध रचा गया।

महाभारत की यह कथा इंगित करती है की शुभ और अशुभ विचारों एवं कर्मों के संस्कार भूमि में देर तक समाये रहते हैं। इसीलिए ऐसी भूमि में ही निवास करना चाहिए जहाँ शुभ विचारों और शुभ कार्यों का समावेश रहा हो।

हम आपको ऐसी ही एक कहानी और सुनाते है जो की श्रवण कुमार के जीवन से सम्बंधित है।

जब श्रवणकुमार ने अपने माता-पिता को कांवर से उतारकर चलाया पैदल :


श्रवणकुमार के माता-पिता अंधे थे। वे उनकी सेवा पूरी तत्परता से करते, किसी प्रकार का कष्ट न होने देते। एक बार माता-पिता ने तीर्थ यात्रा की इच्छा की। श्रवण कुमार ने काँवर बनाकर दोनों को उसमें बिठाया और उन्हें लेकर तीर्थ यात्रा को चल दिया। बहुत से तीर्थ करा लेने पर एक दिन अचानक उसके मन में यह भाव आये कि पिता-माता को पैदल क्यों न चलाया जाय? उसने काँवर जमीन पर रख दी और उन्हें पैदल चलने को कहा। वे चलने तो लगे पर उन्होंने साथ ही यह भी कहा-इस भूमि को जितनी जल्दी हो सके पार कर लेना चाहिए। वे तेजी से चलने लगे जब वह भूमि निकल गई तो श्रवणकुमार को माता-पिता की अवज्ञा करने का बड़ा पश्चाताप हुआ और उसने पैरों पड़ कर क्षमा माँगी तथा फिर काँवर में बिठा लिया।

उसके पिता ने कहा-पुत्र इसमें तुम्हारा दोष नहीं। उस भूमि पर किसी समय मय नामक एक असुर रहता था उसने जन्मते ही अपने ही पिता-माता को मार डाला था, उसी के संस्कार उस भूमि में अभी तक बने हुए हैं इसी से उस क्षेत्र में गुजरते हुए तुम्हें ऐसी बुद्धि उपजी।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े –  भारत के अदभुत मंदिर

सम्पूर्ण पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह

महाभारत से सम्बंधित अन्य पौराणिक कथाएं –

उर्वशी ने क्यों दिया अर्जुन को नपुंसक होने का श्राप ?
भीम में कैसे आया हज़ार हाथियों का बल?
कब, क्यों और कैसे डूबी द्वारका?
आखिर क्यों खाया था पांडवों ने अपने मृत पिता के शरीर का मांस ?
कैसे खत्म हुआ श्रीकृष्ण सहित पूरा यदुवंश?

Mahabharat main karan ki bhumika

कर्ण से जुडी कुछ रोचक बातें (Intersting Facts of Karna Mahabharata)

MARCH 2, 2015 BY AG 4 COMMENTS



Intersting Facts of Karna Mahabharta in Hindi : कर्ण के पिता सूर्य और माता कुंती थी, पर चुकी उनका पालन एक रथ चलाने वाले ने किया था, इसलिए वो सूतपुत्र कहलाएं और इसी कारण उन्हें वो सम्मान नहीं मिला, जिसके वो अधिकारी थे।  इस लेख में आज हम महारथी कर्ण से सम्बंधित कुछ रोचक बातें जानेंगे।



क्यों नहीं चुना द्रौपदी ने कर्ण को अपना पति?

कर्ण द्रोपदी को पसंद करता था और उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था साथ ही द्रौपदी भी कर्ण से बहुत प्रभावित थी और उसकी तस्वीर देखते ही यह निर्णय कर चुकी थी कि वह स्वयंवर में उसी के गले में वरमाला डालेगी। लेकिन फिर भी उसने ऐसा नहीं किया।



द्रोपदी और कर्ण, दोनों एक-दूसरे से विवाह करना चाहते थे लेकिन सूतपुत्र होने की वजह से यह विवाह नहीं हो पाया। नियति ने इन दोनों का विवाह नहीं होने दिया, जिसके परिणामस्वरूप कर्ण, पांडवों से नफरत करने लगा।

द्रोपदी ने कर्ण के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया क्योंकि उसे अपने परिवार के सम्मान को बचाना था। क्या आप जानते है द्रौपदी के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा देने के बाद कर्ण ने दो विवाह किए थे। चलिए आपको बताते हैं किन हालातों में किससे कर्ण ने विवाह किया था।



कर्ण ने किए थे दो विवाह

अविवाहित रहते हुए कुंती ने कर्ण को जन्म दिया था। समाज के लांछनों से बचने के लिए उसने कर्ण को स्वीकार नहीं किया। कर्ण का पालन एक रथ चलाने वाले ने किया जिसकी वजह से कर्ण को सूतपुत्र कहा जाने लगा। कर्ण को गोद लेने वाले उसके पिता आधीरथ चाहते थे कि कर्ण विवाह करे। पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए कर्ण ने रुषाली नाम की एक सूतपुत्री से विवाह किया। कर्ण की दूसरी पत्नी का नाम सुप्रिया था। सुप्रिया का जिक्र महाभारत की कहानी में ज्यादा नहीं किया गया है।



रुषाली और सुप्रिया से कर्ण के नौ पुत्र थे। वृशसेन, वृशकेतु, चित्रसेन, सत्यसेन, सुशेन, शत्रुंजय, द्विपात, प्रसेन और बनसेन। कर्ण के सभी पुत्र महाभारत के युद्ध में शामिल हुए, जिनमें से 8 वीरगति को प्राप्त हो गए। प्रसेन की मौत सात्यकि के हाथों हुई, शत्रुंजय, वृशसेन और द्विपात की अर्जुन, बनसेन की भीम, चित्रसेन, सत्यसेन और सुशेन की नकुल के द्वारा मृत्यु हुई थी।

वृशकेतु एकमात्र ऐसा पुत्र था जो जीवित रहा। कर्ण की मौत के पश्चात उसकी पत्नी रुषाली उसकी चिता में सती हो गई थी। महाभारत के युद्ध के पश्चात जब पांडवों को यह बात पता चली कि कर्ण उन्हीं का ज्येष्ठ था, तब उन्होंने कर्ण के जीवित पुत्र वृशकेतु को इन्द्रप्रस्थ की गद्दी सौंपी थी। अर्जुन के संरक्षण में वृशकेतु ने कई युद्ध भी लड़े थे।



श्री कृष्ण ने क्यों किया कर्ण का अंतिम संस्कार अपने ही हाथों पर?

जब कर्ण मृत्युशैया पर थे तब कृष्ण उनके पास उनके दानवीर होने की परीक्षा लेने के लिए आए। कर्ण ने कृष्ण को कहा कि उसके पास देने के लिए कुछ भी नहीं है। ऐसे में कृष्ण ने उनसे उनका सोने का दांत मांग लिया।

कर्ण ने अपने समीप पड़े पत्थर को उठाया और उससे अपना दांत तोड़कर कृष्ण को दे दिया। कर्ण ने एक बार फिर अपने दानवीर होने का प्रमाण दिया जिससे कृष्ण काफी प्रभावित हुए। कृष्ण ने कर्ण से कहा कि वह उनसे कोई भी वरदान मांग़ सकते हैं।

कर्ण ने कृष्ण से कहा कि एक निर्धन सूत पुत्र होने की वजह से उनके साथ बहुत छल हुए हैं। अगली बार जब कृष्ण धरती पर आएं तो वह पिछड़े वर्ग के लोगों के जीवन को सुधारने के लिए प्रयत्न करें। इसके साथ कर्ण ने दो और वरदान मांगे।

दूसरे वरदान के रूप में कर्ण ने यह मांगा कि अगले जन्म में कृष्ण उन्हीं के राज्य में जन्म लें और तीसरे वरदान में उन्होंने कृष्ण से कहा कि उनका अंतिम संस्कार ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहां कोई पाप ना हो।

पूरी पृथ्वी पर ऐसा कोई स्थान नहीं होने के कारण कृष्ण ने कर्ण का अंतिम संस्कार अपने ही हाथों पर किया। इस तरह दानवीर कर्ण मृत्यु के पश्चात साक्षात वैकुण्ठ धाम को प्राप्त हुए।

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महाभारत से सम्बंधित अन्य पौराणिक कथाएं –

सांपो के सम्पूर्ण कुल विनाश के लिए जनमेजय ने किया था ‘सर्प मेध यज्ञ’
16 पौराणिक कथाएं – पिता के वीर्य और माता के गर्भ के बिना जन्मे पौराणिक पात्रों की
कुरुक्षेत्र को ही क्यों चुना श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के लिए ?
आखिर क्यों खाया था पांडवों ने अपने मृत पिता के शरीर का मांस ?
कैसे खत्म हुआ श्रीकृष्ण सहित पूरा यदुवंश?
Tag- Hindi, Pauranik, Mahabharat, Story, Kahani, Karna, Shri krishna,  Hindu Mythology, Son of Karna, Death of Karna, Marriage of

Jai Shree Krishana

*श्रीकृष्ण भगवान कहते हैं :-*_
      *☝🏻कभी किसी के चहरे को मत देखो बल्कि उसके मन को देखो, क्योंकि...अगर सफेद रंग में वफा होती' तो नमक जख्मों की दवा होती*।
*जैसे जैसे नाम आपका ऊंचा होता है,*
*वैसे वैसे शांत रहना सीखिए*        
*क्योंकि आवाज हमेशा सिक्के ही करते है,*
*नोटों को कभी बजते नहीं देखा*

         🌹जय श्री कृष्णा🌹
       🙏🌹Good Morning🌹🙏